अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पितु सुरपुर बन रघुबर केतू। मैं केवल सब अनरथ हेतु।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपिताजी स्वर्गमें हैं और श्रीरामजी वनमें हैं। केतुके समान केवल मैं ही इन सब अनर्थोंका कारण हूँ। मुझे धिक्कार है! मैं बाँसके वनमें आग उत्पन्न हुआ और कठिन दाह, दु:ख और दोषोंका भागी बना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 480 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पितु सुरपुर बन रघुबर केतू। मैं केवल सब अनरथ हेतु।।
धिग मोहि भयउँ बेनु बन आगी। दुसह दाह दुख दूषन भागी।।
स्रोत अभिलेख 2.164 · पुस्तक पृ. 479, 480
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पितु सुरपुर बन रघुबर केतू। मैं केवल सब अनरथ हेतु।।
English explanation
Father is in heaven, and Rama, the banner of Raghu's lineage, is in the forest; I alone am the cause of all these calamities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितु | पिता दशरथ | Father Dasharatha |
| सुरपुर | स्वर्ग में | in heaven |
| बन | वन में | in the forest |
| रघुबर | रघुवंश के श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu's lineage |
| केतू | ध्वजा, कुल के गौरव | banner, the lineage's glory |
| मैं | मैं | I |
| केवल | ही, अकेला | alone |
| सब | सभी | all |
| अनरथ | अनर्थों का | of calamities |
| हेतु | कारण | cause |
2 धिग मोहि भयउँ बेनु बन आगी। दुसह दाह दुख दूषन भागी।।
English explanation
Shame on me! I have become a fire in a bamboo forest, bearing unbearable anguish, sorrow, and blame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धिग | धिक्कार है | shame upon |
| मोहि | मुझे | me |
| भयउँ | मैं हो गया हूँ | I have become |
| बेनु | बाँस का | of bamboo |
| बन | वन | forest |
| आगी | आग | fire |
| दुसह | असह्य | unbearable |
| दाह | जलन, संताप | burning anguish |
| दुख | दुःख | sorrow |
| दूषन | दोष, कलंक | blame, disgrace |
| भागी | भोगने वाला, भागीदार | one who bears or shares in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.164
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 480
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 479, 480
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।