अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुल कलंकु जेहिं जनमेउ मोही। अपजस भाजन प्रियजन द्रोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिसने कुलके कलंक, अपयशके भाँड़े और प्रियजनोंके द्रोही मुझ-जैसे पुत्रको उत्पन्न किया। तीनों लोकोंमें मेरे समान अभागा कौन है? जिसके कारण, हे माता! तेरी यह दशा हुई!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 480 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कुल कलंकु जेहिं जनमेउ मोही। अपजस भाजन प्रियजन द्रोही।।
को तिभुवन मोहि सरिस अभागी। गति असि तोरि मातु जेहि लागी।।
स्रोत अभिलेख 2.164 · पुस्तक पृ. 479, 480
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कुल कलंकु जेहिं जनमेउ मोही। अपजस भाजन प्रियजन द्रोही।।
English explanation
She gave birth to me—a disgrace to the family, a vessel of dishonor, and a betrayer of loved ones!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुल | कुल का | of the family |
| कलंकु | कलंक | disgrace |
| जेहिं | जिसने | who |
| जनमेउ | जन्म दिया | gave birth to |
| मोही | मुझे | me |
| अपजस | अपयश का | of dishonor |
| भाजन | पात्र | a vessel |
| प्रियजन | प्रियजनों का | of loved ones |
| द्रोही | द्रोही | betrayer |
2 को तिभुवन मोहि सरिस अभागी। गति असि तोरि मातु जेहि लागी।।
English explanation
Mother, who in the three worlds is as unfortunate as I, through whom you have come to such a condition?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| तिभुवन | तीनों लोकों में | in the three worlds |
| मोहि | मेरे | me |
| सरिस | समान | like |
| अभागी | अभागा | unfortunate |
| गति | दशा | condition |
| असि | ऐसी | such |
| तोरि | तुम्हारी | your |
| मातु | हे माँ | O Mother |
| जेहि | जिसके कारण | because of whom |
| लागी | आ पड़ी | befell you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.164
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 480
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 479, 480
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।