अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पितु बनदेव मातु बनदेवी। खग मृग चरन सरोरुह सेवी।।
मूल पाठ
पितु बनदेव मातु बनदेवी। खग मृग चरन सरोरुह सेवी।।
अंतहुँ उचित नृपहि बनबासू। बय बिलोकि हियँ होइ हराँसू।।
स्रोत अभिलेख 2.56 · पुस्तक पृ. 390, 391
भावार्थ
मूल पाठ के बादवनके देवता तुम्हारे पिता होंगे और वनदेवियाँ माता होंगी। वहाँके पशु-पक्षी तुम्हारे चरण- कमलोंके सेवक होंगे। राजाके लिये अन्तमें तो वनवास करना उचित ही है। केवल तुम्हारी [सुकुमार] अवस्था देखकर हृदयमें दु:ख होता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 390 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पितु बनदेव मातु बनदेवी। खग मृग चरन सरोरुह सेवी।।
English explanation
The forest god will be your father and the forest goddess your mother; birds and animals will serve your lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितु | पिता | father |
| बनदेव | वन के देवता | the forest god |
| मातु | माता | mother |
| बनदेवी | वन की देवी | the forest goddess |
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| चरन | तुम्हारे चरण | your feet |
| सरोरुह | कमल | lotuses |
| सेवी | सेवा करनेवाले | those who serve |
2 अंतहुँ उचित नृपहि बनबासू। बय बिलोकि हियँ होइ हराँसू।।
English explanation
Forest dwelling is fitting for a king toward the end of life, but seeing your young age fills my heart with distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंतहुँ | जीवन के अंत में तो | at life's end, indeed |
| उचित | उचित | fitting |
| नृपहि | राजा के लिए | for a king |
| बनबासू | वनवास | forest dwelling |
| बय | तुम्हारी उम्र | your age |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| होइ | होता है | arises |
| हराँसू | त्रास या व्याकुलता | distress or apprehension |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 390
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 390, 391
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।