अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परिहरि रामु सीय जग माहीं। कोउ न कहिहि मोर मत नाहीं।।
मूल पाठ
परिहरि रामु सीय जग माहीं। कोउ न कहिहि मोर मत नाहीं।।
सो मैं सुनब सहब सुखु मानी। अंतहुँ कीच तहाँ जहँ पानी।।
स्रोत अभिलेख 2.182 · पुस्तक पृ. 494, 495
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजी और सीताजीको छोड़कर जगत्में कोई यह नहीं कहेगा कि इस अनर्थमें मेरी सम्मति नहीं है। मैं उसे सुखपूर्वक सुनूँगा और सहूँगा। क्योंकि जहाँ पानी होता है, वहाँ अन्तमें कीचड़ होता ही है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 494 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परिहरि रामु सीय जग माहीं। कोउ न कहिहि मोर मत नाहीं।।
English explanation
Except for Rama and Sita, no one in the world will say that I did not consent to this scheme.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिहरि | छोड़कर | except for |
| रामु | राम | Rama |
| सीय | सीता | Sita |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| कोउ | कोई | anyone |
| न | नहीं | not |
| कहिहि | कहेगा | will say |
| मोर | मेरी | my |
| मत | सहमति | consent |
| नाहीं | नहीं थी | was absent |
2 सो मैं सुनब सहब सुखु मानी। अंतहुँ कीच तहाँ जहँ पानी।।
English explanation
I will hear and bear that accusation willingly; after all, where there is water, there is mud.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस आरोप को | that accusation |
| मैं | मैं | I |
| सुनब | सुनूँगा | will hear |
| सहब | सहूँगा | will bear |
| सुखु | सुख | a pleasure |
| मानी | मानकर | considering it |
| अंतहुँ | आखिर | after all |
| कीच | कीचड़ होता है | there is mud |
| तहाँ | वहाँ | there |
| जहँ | जहाँ | where |
| पानी | पानी है | there is water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.182
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 494
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 494, 495
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