अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पथ गति कुसल साथ सब लीन्हे। चले चित्रकूटहिं चितु दीन्हें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतदनन्तर रास्तेकी पहचान रखनेवाले लोगों (कुशल पथप्रदर्शकों) के साथ सब लोगोंको लिये हुए भरतजी चित्रकूटमें चित्त लगाये चले। भरतजी रामसखा गुहके हाथमें हाथ दिये हुए ऐसे जा रहे हैं, मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये हुए हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 523 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पथ गति कुसल साथ सब लीन्हे। चले चित्रकूटहिं चितु दीन्हें।।
रामसखा कर दीन्हें लागू। चलत देह धरि जनु अनुरागू।।
स्रोत अभिलेख 2.216 · पुस्तक पृ. 523, 523
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पथ गति कुसल साथ सब लीन्हे। चले चित्रकूटहिं चितु दीन्हें।।
English explanation
Taking along all those skilled in knowing the route, Bharata set out with his mind fixed on Chitrakuta.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पथ | मार्ग की | of the route |
| गति | चलने की दिशा और जानकारी | course and navigation |
| कुसल | जानकार; निपुण | knowledgeable; skilled |
| साथ | अपने साथ | along with him |
| सब | सब मार्ग-जानकारों को | all the route guides |
| लीन्हे | ले लिया | took |
| चले | चल पड़े | set out |
| चित्रकूटहिं | चित्रकूट में; चित्रकूट की ओर | on Chitrakuta; toward Chitrakuta |
| चितु | मन | mind |
| दीन्हें | लगाए हुए | having fixed |
2 रामसखा कर दीन्हें लागू। चलत देह धरि जनु अनुरागू।।
English explanation
Bharata walked with his hand in that of Rama’s friend Guha, as though love itself had taken bodily form and was walking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामसखा | राम के मित्र निषादराज गुह | Rama’s friend Guha, the Nishada chief |
| कर | हाथ में | in the hand |
| दीन्हें | दिए हुए; रखे हुए | having placed |
| लागू | अपना हाथ; हाथ का संपर्क | his hand; handclasp |
| चलत | चलते हुए | walking |
| देह | शरीर | a body |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| जनु | मानो | as though |
| अनुरागू | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.216
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 523
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 523, 523
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।