अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पति देवर संग कुसल बहोरी। आइ करौं जेहिं पूजा तोरी।।
मूल पाठ
पति देवर संग कुसल बहोरी। आइ करौं जेहिं पूजा तोरी।।
सुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी। भइ तब बिमल बारि बर बानी।।
स्रोत अभिलेख 2.103 · पुस्तक पृ. 429, 429
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिससे मैं पति और देवरके साथ कुशलपूर्वक लौट आकर तुम्हारी पूजा करूँ। सीताजीकी प्रेमरसमें सनी हुई विनती सुनकर तब गङ्गाजीके निर्मल जलमेंसे श्रेष्ठ वाणी हुई—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 429 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पति देवर संग कुसल बहोरी। आइ करौं जेहिं पूजा तोरी।।
English explanation
“So that I may return safely with my husband and his younger brother and worship you again.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | पति राम | my husband Rama |
| देवर | देवर लक्ष्मण | Lakshmana, my husband's younger brother |
| संग | के साथ | with |
| कुसल | सकुशल | safely |
| बहोरी | फिर लौटकर | returning again |
| आइ | आकर | having come |
| करौं | मैं करूँ | I may perform |
| जेहिं | जिससे | so that |
| पूजा | पूजा | worship |
| तोरी | तुम्हारी | of you |
2 सुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी। भइ तब बिमल बारि बर बानी।।
English explanation
Hearing Sita's plea steeped in love, a gracious voice then arose from the pure water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिय | सीता की | Sita's |
| बिनय | विनती | plea |
| प्रेम | प्रेम | love |
| रस | रस में | in the essence |
| सानी | सनी हुई | steeped |
| भइ | प्रकट हुई | arose |
| तब | तब | then |
| बिमल | निर्मल | pure |
| बारि | जल से | from the water |
| बर | श्रेष्ठ | gracious |
| बानी | वाणी | a voice |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 429
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 429
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।