अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। पूजि पारथिव नायउ माथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर रघुकुलके स्वामी श्रीरामचन्द्रजीने स्नान करके पाॢथवपूजा की और शिवजीको सिर नवाया। सीताजीने हाथ जोड़कर गङ्गाजीसे कहा—हे माता! मेरा मनोरथ पूरा कीजियेगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 429 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। पूजि पारथिव नायउ माथा।।
सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी। मातु मनोरथ पुरउबि मोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.103 · पुस्तक पृ. 429, 429
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। पूजि पारथिव नायउ माथा।।
English explanation
Then Rama, lord of the Raghu lineage, bathed, worshipped an earthen Shiva emblem, and bowed his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मज्जनु | स्नान | bathing |
| करि | करके | having performed |
| रघुकुलनाथा | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| पूजि | पूजा करके | having worshipped |
| पारथिव | मिट्टी से बने शिवलिंग की | an earthen Shiva emblem |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| माथा | सिर | his head |
2 सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी। मातु मनोरथ पुरउबि मोरी।।
English explanation
Sita joined her hands and said to the Ganges, “Mother, please fulfill my wish.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सियँ | सीता ने | Sita |
| सुरसरिहि | देवनदी गंगा से | to the Ganges, the celestial river |
| कहेउ | कहा | said |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
| मातु | हे माता | O Mother |
| मनोरथ | अभिलाषा | wish |
| पुरउबि | पूरी करना | please fulfill |
| मोरी | मेरी | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 429
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 429
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।