अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निदरहिं सरित सिंधु सर भारी। रूप बिंदु जल होहिं सुखारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतथा जो भारी-भारी नदियों, समुद्रों और झीलोंका निरादर करते हैं और आपके सौन्दर्य [रूपी मेघ] के एक बूँद जलसे सुखी हो जाते हैं (अर्थात् आपके दिव्य सच्चिदानन्दमय स्वरूपके किसी एक अङ्गकी जरा-सी भी झाँकीके सामने स्थूल, सूक्ष्म और कारण तीनों जगत्के, अर्थात् पृथ्वी, स्वर्ग और ब्रह्मलोकतकके सौन्दर्यका तिरस्कार करते हैं), हे रघुनाथजी! उन लोगोंके हृदयरूपी सुखदायी भवनोंमें आप भाई लक्ष्मणजी और सीताजीसहित निवास कीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 450 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निदरहिं सरित सिंधु सर भारी। रूप बिंदु जल होहिं सुखारी।।
तिन्ह के हृदय सदन सुखदायक। बसहु बंधु सिय सह रघुनायक।।
स्रोत अभिलेख 2.128 · पुस्तक पृ. 450, 451
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निदरहिं सरित सिंधु सर भारी। रूप बिंदु जल होहिं सुखारी।।
English explanation
They disregard rivers, oceans, and vast lakes, and find happiness in a single drop of the water of your beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निदरहिं | तुच्छ मानते हैं | disregard |
| सरित | नदियों को | rivers |
| सिंधु | समुद्रों को | oceans |
| सर | सरोवरों को | lakes |
| भारी | विशाल | vast |
| रूप | आपके रूपरूपी | of your beauty |
| बिंदु | एक बूँद | a drop |
| जल | जल से | of water |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 तिन्ह के हृदय सदन सुखदायक। बसहु बंधु सिय सह रघुनायक।।
English explanation
Their hearts are homes that bring happiness; O lord of Raghu’s line, dwell there with your brother Lakshmana and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| के | के | of |
| हृदय | हृदय | hearts |
| सदन | घर | homes |
| सुखदायक | सुख देने वाले | giving happiness |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| बंधु | भाई लक्ष्मण | your brother Lakshmana |
| सिय | सीता | Sita |
| सह | के साथ | with |
| रघुनायक | हे रघुकुल के नायक राम | O Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 450
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 450, 451
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।