अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निकसि बसिष्ठ द्वार भए ठाढ़े। देखे लोग बिरह दव दाढ़े।।
मूल पाठ
निकसि बसिष्ठ द्वार भए ठाढ़े। देखे लोग बिरह दव दाढ़े।।
कहि प्रिय बचन सकल समुझाए। बिप्र बृंद रघुबीर बोलाए।।
स्रोत अभिलेख 2.8 · पुस्तक पृ. 409, 410
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजमहलसे निकलकर श्रीरामचन्द्रजी वसिष्ठजीके दरवाजेपर जा खड़े हुए और देखा कि सब लोग विरहकी अग्निमें जल रहे हैं। उन्होंने प्रिय वचन कहकर सबको समझाया। फिर श्रीरामचन्द्रजीने ब्राह्मणोंकी मण्डलीको बुलाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 409 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निकसि बसिष्ठ द्वार भए ठाढ़े। देखे लोग बिरह दव दाढ़े।।
English explanation
AI draft: Vasistha came out and stood at the doorway. He saw the people scorched by the wildfire of separation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निकसि | बाहर निकलकर | having come out |
| बसिष्ठ | गुरु वसिष्ठ | Vasistha, the royal preceptor |
| द्वार | द्वार पर | at the doorway |
| भए | हो गए | became |
| ठाढ़े | खड़े | standing |
| देखे | देखा | saw |
| लोग | लोगों को | the people |
| बिरह | वियोग की | of separation |
| दव | दावाग्नि में | in a wildfire |
| दाढ़े | झुलसे हुए | scorched |
2 कहि प्रिय बचन सकल समुझाए। बिप्र बृंद रघुबीर बोलाए।।
English explanation
With kind words, Vasistha consoled everyone. Rama summoned the assembled Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having spoken |
| प्रिय | प्रिय, मधुर | kind, pleasing |
| बचन | वचन | words |
| सकल | सबको | everyone |
| समुझाए | समझाया और सांत्वना दी | reassured and consoled |
| बिप्र | ब्राह्मणों का | of Brahmins |
| बृंद | समूह | group |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम ने | Rama, hero of Raghu's lineage |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 409
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 409, 410
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।