अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निंदहिं आपु सराहहिं मीना। धिग जीवनु रघुबीर बिहीना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे लोग अपनी निन्दा करते हैं और मछलियोंकी सराहना करते हैं। [कहते हैं—] श्रीरामचन्द्रजीके बिना हमारे जीनेको धिक्कार है। विधाताने यदि प्यारेका वियोग ही रचा, तो फिर उसने माँगनेपर मृत्यु क्यों नहीं दी!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 414 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
निंदहिं आपु सराहहिं मीना। धिग जीवनु रघुबीर बिहीना।।
जौं पै प्रिय बियोगु बिधि कीन्हा। तौ कस मरनु न मागें दीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.86 · पुस्तक पृ. 414, 415
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निंदहिं आपु सराहहिं मीना। धिग जीवनु रघुबीर बिहीना।।
English explanation
They reproach themselves and praise the fish: “Shame on a life without Rama!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निंदहिं | निंदा करते हैं | reproach |
| आपु | अपने आप की | themselves |
| सराहहिं | प्रशंसा करते हैं | praise |
| मीना | मछलियों की | the fish |
| धिग | धिक्कार है | shame on |
| जीवनु | जीवन | life |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| बिहीना | से रहित | without |
2 जौं पै प्रिय बियोगु बिधि कीन्हा। तौ कस मरनु न मागें दीन्हा।।
English explanation
If the Creator brought about separation from our beloved, why did he not grant death without our asking?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| पै | ही; निश्चय ही | indeed |
| प्रिय | प्रिय राम से | from beloved Rama |
| बियोगु | वियोग | separation |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| कीन्हा | किया | brought about |
| तौ | तो | then |
| कस | क्यों | why |
| मरनु | मृत्यु | death |
| न | बिना | without |
| मागें | माँगे | asking |
| दीन्हा | दे दिया | grant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 414
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 414, 415
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।