अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि करत प्रलाप कलापा। आए अवध भरे परितापा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकार बहुत-से प्रलाप करते हुए वे सन्तापसे भरे हुए अयोध्याजीमें आये। उन लोगोंके विषम वियोगकी दशाका वर्णन नहीं किया जा सकता। [चौदह सालकी] अवधिकी आशासे ही वे प्राणोंको रख रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 415 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि बिधि करत प्रलाप कलापा। आए अवध भरे परितापा।।
बिषम बियोगु न जाइ बखाना। अवधि आस सब राखहिं प्राना।।
स्रोत अभिलेख 2.86 · पुस्तक पृ. 414, 415
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि बिधि करत प्रलाप कलापा। आए अवध भरे परितापा।।
English explanation
Lamenting in this way, they returned to Ayodhya filled with deep anguish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| करत | करते हुए | making |
| प्रलाप | विलाप | lamentations |
| कलापा | समूह; अनेक | a succession of |
| आए | लौट आए | returned |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| भरे | भरे हुए | filled with |
| परितापा | गहरे संताप से | deep anguish |
2 बिषम बियोगु न जाइ बखाना। अवधि आस सब राखहिं प्राना।।
English explanation
That terrible separation cannot be described. All sustain their lives in hope of the exile’s allotted term ending.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषम | असह्य; भीषण | terrible; unbearable |
| बियोगु | वियोग | separation |
| न | नहीं | not |
| जाइ | सकता है | can be |
| बखाना | वर्णन किया | described |
| अवधि | निर्धारित वनवास-अवधि की | of the allotted exile term |
| आस | आशा से | in hope |
| सब | सभी | all |
| राखहिं | बनाए रखते हैं | sustain |
| प्राना | प्राण | their lives |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 415
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 414, 415
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।