अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ समुझि मन करिअ बिचारू। राम बियोग पयोधि अपारू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! आप मनमें समझकर विचार कीजिये कि श्रीरामचन्द्रका वियोग अपार समुद्र है। अयोध्या जहाज है और आप उसके कर्णधार (खेनेवाले) हैं। सब प्रियजन (कुटुम्बी और प्रजा) ही यात्रियोंका समाज है जो इस जहाजपर चढ़ा हुआ है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 471 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाथ समुझि मन करिअ बिचारू। राम बियोग पयोधि अपारू।।
करनधार तुम्ह अवध जहाजू। चढ़ेउ सकल प्रिय पथिक समाजू।।
स्रोत अभिलेख 2.154 · पुस्तक पृ. 471, 472
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाथ समुझि मन करिअ बिचारू। राम बियोग पयोधि अपारू।।
English explanation
My lord, reflect thoughtfully in your heart. Separation from Rama is a boundless ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| समुझि | समझ-बूझकर | with understanding |
| मन | मन में | in your mind |
| करिअ | कीजिए | please undertake |
| बिचारू | विचार | reflection |
| राम | राम से | from Rama |
| बियोग | वियोग | separation |
| पयोधि | समुद्र | ocean |
| अपारू | जिसका पार नहीं; अपार | boundless |
2 करनधार तुम्ह अवध जहाजू। चढ़ेउ सकल प्रिय पथिक समाजू।।
English explanation
You are the helmsman, and Ayodhya is the ship; the entire company of dear travelers is aboard.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करनधार | जहाज के संचालक; कर्णधार | helmsman |
| तुम्ह | आप | you |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya, the kingdom |
| जहाजू | जहाज | ship |
| चढ़ेउ | सवार हुआ है | has boarded |
| सकल | समस्त | entire |
| प्रिय | प्रिय; स्नेहपात्र | dear; beloved |
| पथिक | यात्रियों का | of travelers |
| समाजू | समुदाय | company |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.154
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 471
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 471, 472
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।