अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धीरजु धरिअ त पाइअ पारू। नाहिं त बूड़िहि सबु परिवारू।।
मूल पाठ
धीरजु धरिअ त पाइअ पारू। नाहिं त बूड़िहि सबु परिवारू।।
जौं जियँ धरिअ बिनय पिय मोरी। रामु लखनु सिय मिलहिं बहोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.154 · पुस्तक पृ. 471, 472
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप धीरज धरियेगा तो सब पार पहुँच जायँगे। नहीं तो सारा परिवार डूब जायगा। हे प्रिय स्वामी! यदि मेरी विनती हृदयमें धारण कीजियेगा तो श्रीराम, लक्ष्मण, सीता फिर आ मिलेंगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 472 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 धीरजु धरिअ त पाइअ पारू। नाहिं त बूड़िहि सबु परिवारू।।
English explanation
Keep your courage, and the farther shore can be reached; otherwise the whole family will drown.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धीरजु | धैर्य | courage; composure |
| धरिअ | धारण कीजिए | please maintain |
| त | तो | then |
| पाइअ | पाया जा सकता है | can be reached |
| पारू | दूसरा किनारा | farther shore |
| नाहिं | नहीं | not |
| त | तो; अन्यथा | then; otherwise |
| बूड़िहि | डूब जाएगा | will drown |
| सबु | सारा | whole |
| परिवारू | परिवार | family |
2 जौं जियँ धरिअ बिनय पिय मोरी। रामु लखनु सिय मिलहिं बहोरी।।
English explanation
Beloved, if you take my plea to heart, you will meet Rama, Lakshmana, and Sita again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| धरिअ | रखें; स्वीकार करें | hold; heed |
| बिनय | विनती | plea |
| पिय | हे प्रिय पति | beloved husband |
| मोरी | मेरी | my |
| रामु | राम | Rama |
| लखनु | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama's brother |
| सिय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
| मिलहिं | मिलेंगे | will be met again |
| बहोरी | फिर | again |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.154
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 472
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 471, 472
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।