अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[उसने कहा—] हे नाथ! आज मैंने क्या नहीं पाया! मेरे दोष, दु:ख और दरिद्रताकी आग आज बुझ गयी है। मैंने बहुत समयतक मजदूरी की। विधाताने आज बहुत अच्छी भरपूर मजदूरी दे दी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 428 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।।
बहुत काल मैं कीन्हि मजूरी। आजु दीन्ह बिधि बनि भलि भूरी।।
स्रोत अभिलेख 2.102 · पुस्तक पृ. 428, 428
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।।
English explanation
‘Lord, what have I not gained today! My faults, suffering, and the wildfire of poverty have vanished.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| आजु | आज | today |
| मैं | मैंने | I |
| काह | क्या | what |
| न | नहीं | not |
| पावा | पाया | gained |
| मिटे | मिट गए | vanished |
| दोष | दोष | faults |
| दुख | दुःख | suffering |
| दारिद | दरिद्रता | poverty |
| दावा | दावाग्नि | wildfire |
2 बहुत काल मैं कीन्हि मजूरी। आजु दीन्ह बिधि बनि भलि भूरी।।
English explanation
‘I have labored for a long time; today Providence has given me a generous and excellent reward.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुत | बहुत | a long |
| काल | समय तक | time |
| मैं | मैंने | I |
| कीन्हि | की | did |
| मजूरी | मजदूरी | wage labor |
| आजु | आज | today |
| दीन्ह | दी | gave |
| बिधि | विधाता ने | Providence, the Creator |
| बनि | मजदूरी का प्रतिफल | wages; reward for labor |
| भलि | अच्छी | excellent |
| भूरी | भरपूर | abundant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 428
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 428, 428
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।