अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नतरु जाहिं बन तीनिउ भाई। बहुरिअ सीय सहित रघुराई।।
मूल पाठ
नतरु जाहिं बन तीनिउ भाई। बहुरिअ सीय सहित रघुराई।।
जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई। करुना सागर कीजिअ सोई।।
स्रोत अभिलेख 2.269 · पुस्तक पृ. 567, 568
भावार्थ
मूल पाठ के बादअथवा हम तीनों भाई वन चले जायँ और हे श्रीरघुनाथजी! आप श्रीसीताजीसहित [अयोध्याको] लौट जाइये। हे दयासागर! जिस प्रकारसे प्रभुका मन प्रसन्न हो, वही कीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 567 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नतरु जाहिं बन तीनिउ भाई। बहुरिअ सीय सहित रघुराई।।
English explanation
Alternatively, let us three brothers go to the forest, and let Rama return with Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नतरु | अथवा; नहीं तो | alternatively; otherwise |
| जाहिं | जाएँ | may go |
| बन | वन में | to the forest |
| तीनिउ | तीनों | all three |
| भाई | भाई | brothers |
| बहुरिअ | लौट आएँ | may return |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सहित | के साथ | with |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
2 जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई। करुना सागर कीजिअ सोई।।
English explanation
O Lord, ocean of compassion, do whatever pleases your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस | whichever |
| बिधि | प्रकार से | way |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| मन | मन | heart |
| होई | हो | may be |
| करुना | करुणा के | of compassion |
| सागर | हे सागर | O ocean |
| कीजिअ | कीजिए | please do |
| सोई | वही | that very thing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.269
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 567
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 567, 568
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।