अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नगर लोग सब सजि सजि जाना। चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना।।
मूल पाठ
नगर लोग सब सजि सजि जाना। चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना।।
सिबिका सुभग न जाहिं बखानी। चढ़ि चढ़ि चलत भई सब रानी।।
स्रोत अभिलेख 2.187 · पुस्तक पृ. 498, 498
भावार्थ
मूल पाठ के बादनगरके सब लोग रथोंको सजा-सजाकर चित्रकूटको चल पड़े। जिनका वर्णन नहीं हो सकता, ऐसी सुन्दर पालकियोंपर चढ़-चढ़कर सब रानियाँ चलीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 498 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नगर लोग सब सजि सजि जाना। चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना।।
English explanation
All the townspeople readied their respective conveyances and departed for Chitrakuta.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नगर | नगर के | of the city |
| लोग | लोग | people |
| सब | सभी | all |
| सजि | तैयार करके | having readied |
| सजि | अपने-अपने तैयार करके | each readying their own |
| जाना | वाहन | conveyances |
| चित्रकूट | चित्रकूट, राम के वनवास का स्थान | Chitrakuta, Rama's forest dwelling place |
| कहँ | की ओर | toward |
| कीन्ह | किया | made |
| पयाना | प्रस्थान | departure |
2 सिबिका सुभग न जाहिं बखानी। चढ़ि चढ़ि चलत भई सब रानी।।
English explanation
The lovely palanquins were beyond description. All the queens boarded their respective palanquins and set out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिबिका | पालकियाँ | palanquins |
| सुभग | सुंदर | lovely |
| न | नहीं | not |
| जाहिं | की जा सकतीं | can be |
| बखानी | वर्णित | described |
| चढ़ि | चढ़कर | having boarded |
| चढ़ि | एक-एक करके चढ़कर | each having boarded |
| चलत | चलने लगीं | setting out |
| भई | हो गईं | began |
| सब | सभी | all |
| रानी | रानियाँ | queens |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.187
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 498
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 498, 498
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