अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अरुंधती अरु अगिनि समाऊ। रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसबसे पहले मुनिराज वसिष्ठजी अरुन्धती और अग्निहोत्रकी सब सामग्रीसहित रथपर सवार होकर चले। फिर ब्राह्मणोंके समूह, जो सब-के-सब तपस्या और तेजके भण्डार थे, अनेकों सवारियोंपर चढ़कर चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 498 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अरुंधती अरु अगिनि समाऊ। रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ।।
बिप्र बृंद चढ़ि बाहन नाना। चले सकल तप तेज निधाना।।
स्रोत अभिलेख 2.187 · पुस्तक पृ. 498, 498
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अरुंधती अरु अगिनि समाऊ। रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ।।
English explanation
The foremost sage Vasishtha set out first in a chariot, accompanied by Arundhati and the equipment for the sacred fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अरुंधती | वसिष्ठ की पत्नी अरुंधती | Arundhati, Vasishtha's wife |
| अरु | और | and |
| अगिनि | यज्ञाग्नि की | for the sacred fire |
| समाऊ | सामग्री; उपकरण | equipment; supplies |
| रथ | रथ पर | onto a chariot |
| चढ़ि | चढ़कर | having mounted |
| चले | चले | set out |
| प्रथम | सबसे पहले | first |
| मुनिराऊ | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ | Vasishtha, foremost among sages |
2 बिप्र बृंद चढ़ि बाहन नाना। चले सकल तप तेज निधाना।।
English explanation
All the Brahmins, repositories of ascetic discipline and spiritual radiance, set out on various vehicles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मणों का | of Brahmins |
| बृंद | समूह | company |
| चढ़ि | चढ़कर | having mounted |
| बाहन | वाहनों पर | vehicles |
| नाना | विभिन्न | various |
| चले | चले | set out |
| सकल | सभी | all |
| तप | तपस्या के | of ascetic discipline |
| तेज | आध्यात्मिक तेज के | of spiritual radiance |
| निधाना | भंडार | repositories |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.187
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 498
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 498, 498
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।