अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धीरजु धरेउ कुअवसर जानी। सहज सुह्द बोली मृदु बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपरन्तु कुसमय जानकर धैर्य धारण किया और स्वभावसे ही हित चाहनेवाली सुमित्राजी कोमल वाणीसे बोलीं—हे तात! जानकीजी तुम्हारी माता हैं और सब प्रकारसे स्नेह करनेवाले श्रीरामचन्द्रजी तुम्हारे पिता हैं!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 404 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धीरजु धरेउ कुअवसर जानी। सहज सुह्द बोली मृदु बानी।।
तात तुम्हारि मातु बैदेही। पिता रामु सब भाँति सनेही।।
स्रोत अभिलेख 2.74 · पुस्तक पृ. 404, 405
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धीरजु धरेउ कुअवसर जानी। सहज सुह्द बोली मृदु बानी।।
English explanation
This is an AI-generated interpretive draft. Recognizing the difficult occasion, Sumitra steadied herself and, naturally well-disposed, spoke gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धीरजु | धैर्य | patience |
| धरेउ | धारण किया | maintained |
| कुअवसर | बुरा या कठिन अवसर | an adverse occasion |
| जानी | जानकर | recognizing |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| सुह्द | हितैषिणी | well-disposed |
| बोली | उन्होंने कहा | she spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
2 तात तुम्हारि मातु बैदेही। पिता रामु सब भाँति सनेही।।
English explanation
Dear son, Sita is your mother, and Rama, loving in every way, is your father.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे बेटा | dear son |
| तुम्हारि | तुम्हारी | your |
| मातु | माता | mother |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
| पिता | पिता | father |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| सनेही | स्नेह करने वाले | loving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 404
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 404, 405
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।