अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धन्य जनमु जगतीतल तासू। पितहि प्रमोदु चरित सुनि जासू।।
मूल पाठ
धन्य जनमु जगतीतल तासू। पितहि प्रमोदु चरित सुनि जासू।।
चारि पदारथ करतल ताकें। प्रिय पितु मातु प्रान सम जाकें।।
स्रोत अभिलेख 2.46 · पुस्तक पृ. 381, 382
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उन्होंने फिर कहा—] इस पृथ्वीतलपर उसका जन्म धन्य है जिसके चरित्र सुनकर पिताको परम आनन्द हो। जिसको माता-पिता प्राणोंके समान प्रिय हैं, चारों पदार्थ (अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष) उसके करतलगत (मु_ीमें) रहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 381 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धन्य जनमु जगतीतल तासू। पितहि प्रमोदु चरित सुनि जासू।।
English explanation
AI-generated draft: Blessed is the birth in this world of one whose conduct brings joy to his father when he hears of it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य | blessed |
| जनमु | जन्म | birth |
| जगतीतल | पृथ्वी पर | on earth |
| तासू | उसका | of that person |
| पितहि | पिता को | to the father |
| प्रमोदु | आनंद | joy |
| चरित | आचरण | conduct |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| जासू | जिसका | whose |
2 चारि पदारथ करतल ताकें। प्रिय पितु मातु प्रान सम जाकें।।
English explanation
All four aims of life lie in the hands of one to whom father and mother are as dear as life itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारि | चार | four |
| पदारथ | पुरुषार्थ | aims of life |
| करतल | हथेली में | in the palm; within reach |
| ताकें | उसके | of that person |
| प्रिय | प्यारे | dear |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| प्रान | प्राण | life |
| सम | के समान | as dear as |
| जाकें | जिसके लिए | to whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 381
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 381, 382
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।