अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आयसु पालि जनम फलु पाई। ऐहउँ बेगिहिं होउ रजाई।।
मूल पाठ
आयसु पालि जनम फलु पाई। ऐहउँ बेगिहिं होउ रजाई।।
बिदा मातु सन आवउँ मागी। चलिहउँ बनहि बहुरि पग लागी।।
स्रोत अभिलेख 2.46 · पुस्तक पृ. 381, 382
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपकी आज्ञा पालन करके और जन्मका फल पाकर मैं जल्दी ही लौट आऊँगा, अत: कृपया आज्ञा दीजिये। मातासे विदा माँग आता हूँ। फिर आपके पैर लगकर (प्रणाम करके) वनको चलूँगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 382 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आयसु पालि जनम फलु पाई। ऐहउँ बेगिहिं होउ रजाई।।
English explanation
By obeying the command and gaining the fulfillment of my birth, I shall return quickly; grant me permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा | command |
| पालि | पालन करके | having obeyed |
| जनम | जन्म का | of birth |
| फलु | फल; सार्थकता | fruit; fulfillment |
| पाई | प्राप्त करके | having obtained |
| ऐहउँ | मैं लौट आऊँगा | I shall return |
| बेगिहिं | शीघ्र ही | very soon |
| होउ | हो; दी जाए | may there be; let it be granted |
| रजाई | अनुमति | permission |
2 बिदा मातु सन आवउँ मागी। चलिहउँ बनहि बहुरि पग लागी।।
English explanation
I shall return after taking leave of my mother, then depart for the forest after bowing at your feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिदा | विदा; जाने की अनुमति | leave; permission to depart |
| मातु | माता | mother |
| सन | से | from |
| आवउँ | मैं आऊँगा | I shall come back |
| मागी | माँगकर | having asked |
| चलिहउँ | मैं चलूँगा | I shall depart |
| बनहि | वन को | to the forest |
| बहुरि | फिर | then; again |
| पग | चरण | feet |
| लागी | छूकर; प्रणाम करके | having touched; having bowed to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 382
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 381, 382
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।