अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहुँ सत्य जग अपजसु लेहू।।
मूल पाठ
देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहुँ सत्य जग अपजसु लेहू।।
सत्य सराहि कहेहु बरु देना। जानेहु लेइहि मागि चबेना।।
स्रोत अभिलेख 2.3 · पुस्तक पृ. 368, 369
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपने ही वर देनेको कहा था, अब भले ही न दीजिये। सत्यको छोड़ दीजिये और जगत्में अपयश लीजिये। सत्यकी बड़ी सराहना करके वर देनेको कहा था। समझा था कि यह चबेना ही माँग लेगी!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 369 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहुँ सत्य जग अपजसु लेहू।।
English explanation
You said you would grant them; now, if you will, do not grant the boons. Abandon truth and earn disgrace in the world!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देन | देने के लिए | to give |
| कहेहु | आपने कहा था | you said |
| अब | अब | now |
| जनि | मत | do not |
| बरु | वरदान | the boons |
| देहू | दीजिए | grant |
| तजहुँ | छोड़ दीजिए | abandon |
| सत्य | सत्य; वचनपालन | truth; keeping your word |
| जग | संसार में | in the world |
| अपजसु | अपयश; बदनामी | disgrace; ill repute |
| लेहू | लीजिए | take; earn |
2 सत्य सराहि कहेहु बरु देना। जानेहु लेइहि मागि चबेना।।
English explanation
Praising truth, you said you would grant the boons. You thought I would ask for just a handful of roasted grain!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्य | सत्य | truth |
| सराहि | प्रशंसा करके | having praised |
| कहेहु | आपने कहा | you said |
| बरु | वरदान | boons |
| देना | देना; प्रदान करना | to grant |
| जानेहु | आपने समझा था | you supposed |
| लेइहि | ले लेगी | she would take |
| मागि | माँगकर | having asked for |
| चबेना | भुने अन्न का साधारण नाश्ता | a simple snack of roasted grain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 369
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 368, 369
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।