अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि दूरि तें कहि निज नामू। कीन्ह मुनीसहि दंड प्रनामू।।
मूल पाठ
देखि दूरि तें कहि निज नामू। कीन्ह मुनीसहि दंड प्रनामू।।
जानि रामप्रिय दीन्हि असीसा। भरतहि कहेउ बुझाइ मुनीसा।।
स्रोत अभिलेख 2.193 · पुस्तक पृ. 503, 503
भावार्थ
मूल पाठ के बादनिषादराजने मुनिराज वसिष्ठजीको देखकर अपना नाम बतलाकर दूरहीसे दण्डवत्-प्रणाम किया। मुनीश्वर वसिष्ठजीने उसको रामका प्यारा जानकर आशीर्वाद दिया और भरतजीको समझाकर कहा [कि यह श्रीरामजीका मित्र है]॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 503 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि दूरि तें कहि निज नामू। कीन्ह मुनीसहि दंड प्रनामू।।
English explanation
Seeing the chief sage Vasistha from a distance, Guha announced his name and bowed full-length before him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| दूरि | दूर | a distance |
| तें | से | from |
| कहि | कहकर; बताकर | having stated |
| निज | अपना | his own |
| नामू | नाम | name |
| कीन्ह | किया | performed |
| मुनीसहि | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ को | to Vasistha, the chief sage |
| दंड | दंडवत; शरीर सीधा फैलाकर | full-length prostration |
| प्रनामू | प्रणाम | obeisance |
2 जानि रामप्रिय दीन्हि असीसा। भरतहि कहेउ बुझाइ मुनीसा।।
English explanation
Recognizing Guha as dear to Rama, the chief sage blessed him and explained who he was to Bharata.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | recognizing |
| रामप्रिय | राम के प्रिय | dear to Rama |
| दीन्हि | दी | gave |
| असीसा | आशीष; आशीर्वाद | a blessing |
| भरतहि | भरत को | to Bharata |
| कहेउ | कहा; बताया | said; told |
| बुझाइ | समझाकर; परिचय देकर | explaining; introducing |
| मुनीसा | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ ने | Vasistha, the chief sage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.193
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 503
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 503, 503
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।