अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा।।
मूल पाठ
देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा।।
प्रेम मगन अस राज समाजू। जनु फिरि अवध चले रघुराजू।।
स्रोत अभिलेख 2.225 · पुस्तक पृ. 530, 531
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब लोग उस पर्वतको देखकर 'जानकी-जीवन श्रीरामचन्द्रजीकी जय हो। ऐसा कहकर दण्डवत्-प्रणाम करते हैं। राजसमाज प्रेममें ऐसा मग्र है मानो श्रीरघुनाथजी अयोध्याको लौट चले हों॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 531 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा।।
English explanation
Seeing the mountain, everyone bows in full prostration, saying, ‘Victory to Rama, the very life of Janaki!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| करहिं | करते हैं | perform |
| सब | सभी | everyone |
| दंड | दंडवत होकर | fully prostrate |
| प्रनामा | प्रणाम | obeisance |
| कहि | कहकर | saying |
| जय | जय हो | victory to |
| जानकि | जानकी अर्थात सीता के | of Janaki, Sita |
| जीवन | प्राणप्रिय | the very life |
| रामा | राम | Rama |
2 प्रेम मगन अस राज समाजू। जनु फिरि अवध चले रघुराजू।।
English explanation
The royal company is so absorbed in love that it seems as though Rama, lord of Raghu’s line, has set out to return to Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| अस | इस प्रकार | in such a way |
| राज | राजकीय | royal |
| समाजू | समुदाय | company |
| जनु | मानो | as though |
| फिरि | लौटकर | returning |
| अवध | अयोध्या को | to Ayodhya |
| चले | चल पड़े हों | had set out |
| रघुराजू | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.225
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 531
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 530, 531
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।