अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दुचित कतहुँ परितोषु न लहहीं। एक एक सन मरमु न कहहीं।।
मूल पाठ
दुचित कतहुँ परितोषु न लहहीं। एक एक सन मरमु न कहहीं।।
लखि हियँ हँसि कह कृपानिधानू। सरिस स्वान मघवान जुबानू।।
स्रोत अभिलेख 2.302 · पुस्तक पृ. 596, 597
भावार्थ
मूल पाठ के बादचित्त दोतरफा हो जानेसे वे कहीं सन्तोष नहीं पाते और एक-दूसरेसे अपना मर्म भी नहीं कहते। कृपानिधान श्रीरामचन्द्रजी यह दशा देखकर हृदयमें हँसकर कहने लगे—कुत्ता, इन्द्र और नवयुवक (कामी पुरुष) एक-सरीखे (एक ही स्वभावके) हैं। [पाणिनीय व्याकरणके अनुसार श्वन्, युवन् और मघवन् शब्दोंके रूप भी एक-सरीखे होते हैं]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 597 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दुचित कतहुँ परितोषु न लहहीं। एक एक सन मरमु न कहहीं।।
English explanation
Divided in mind, they find satisfaction nowhere and do not reveal their inner feelings to one another.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुचित | दुविधाग्रस्त | of divided mind |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| परितोषु | संतोष | contentment |
| न | नहीं | not |
| लहहीं | पाते हैं | find; obtain |
| एक | एक व्यक्ति | one person |
| एक | दूसरे व्यक्ति | another person |
| सन | से | to |
| मरमु | मन की गुप्त बात | inner feelings; private thoughts |
| न | नहीं | not |
| कहहीं | कहते हैं | tell |
2 लखि हियँ हँसि कह कृपानिधानू। सरिस स्वान मघवान जुबानू।।
English explanation
Seeing this, Rama, the treasury of compassion, laughs inwardly and says, ‘Indra is like a young dog.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर; समझकर | seeing; perceiving |
| हियँ | हृदय में; मन ही मन | inwardly; in his heart |
| हँसि | हँसकर | laughing |
| कह | कहते हैं | says |
| कृपानिधानू | कृपा के भंडार राम | Rama, the treasury of compassion |
| सरिस | के समान | like |
| स्वान | कुत्ता | a dog |
| मघवान | देवराज इंद्र | Indra, king of the gods |
| जुबानू | जवान; युवा | young |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.302
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 597
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 596, 597
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