अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी।।
मूल पाठ
दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी।।
अस कस कहहु मानि मन ऊना। सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना।।
स्रोत अभिलेख 2.21 · पुस्तक पृ. 360, 361
भावार्थ
मूल पाठ के बादरानीने बहुत प्रकारके दीन वचन कहे। उन्हें सुनकर कुबरीने त्रियाचरित्र फैलाया। [वह बोली—] तुम मनमें ग्लानि मानकर ऐसा क्यों कह रही हो, तुम्हारा सुख-सुहाग दिन-दिन दूना होगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 360 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी।।
English explanation
Queen Kaikeyi speaks pitiably in many ways. Hearing her, the hunchbacked Manthara devises a woman’s stratagem.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन | दीन; असहायता भरे | piteous; helpless |
| बचन | वचन; बातें | words |
| कह | कहती हैं | says |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| रानी | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| कुबरीं | कुबड़ी मंथरा ने | the hunchbacked Manthara |
| तियमाया | स्त्री-कपट; स्त्री की छलयुक्त युक्ति | a woman’s deceptive stratagem |
| ठानी | रची; ठान ली | devised; resolved upon |
2 अस कस कहहु मानि मन ऊना। सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना।।
English explanation
Why speak like this, feeling diminished in spirit? Your happiness and marital good fortune will double day by day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus; like this |
| कस | क्यों | why |
| कहहु | तुम कहती हो | you say |
| मानि | मानकर; समझकर | considering; feeling |
| मन | मन को; मन में | your mind; in spirit |
| ऊना | हीन; छोटा | diminished; inferior |
| सुखु | सुख | happiness |
| सोहागु | वैवाहिक सौभाग्य | marital good fortune |
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| कहुँ | लिए | for |
| दिन | दिन-दिन | day by day |
| दूना | दोगुना | twofold |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 360
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 360, 361
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।