अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दीख मंथरा नगरु बनावा। मंजुल मंगल बाज बधावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमन्थराने देखा कि नगर सजाया हुआ है। सुन्दर मङ्गलमय बधावे बज रहे हैं। उसने लोगोंसे पूछा कि कैसा उत्सव है ? [उनसे] श्रीरामचन्द्रजीके राजतिलककी बात सुनते ही उसका हृदय जल उठा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 354 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दीख मंथरा नगरु बनावा। मंजुल मंगल बाज बधावा।।
पूछेसि लोगन्ह काह उछाहू। राम तिलकु सुनि भा उर दाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.13 · पुस्तक पृ. 354, 354
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दीख मंथरा नगरु बनावा। मंजुल मंगल बाज बधावा।।
English explanation
Manthara saw the city decorated, with delightful instruments sounding auspicious celebrations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीख | देखा | saw |
| मंथरा | कैकेयी की दासी मंथरा ने | Manthara, Kaikeyi’s maid |
| नगरु | नगर को | the city |
| बनावा | सजाया हुआ | decorated |
| मंजुल | सुंदर, मनोहर | delightful |
| मंगल | शुभ उत्सव के | auspicious |
| बाज | बाजे; बज रहे थे | instruments sounding |
| बधावा | बधाई के उत्सवी संगीत | celebratory music |
2 पूछेसि लोगन्ह काह उछाहू। राम तिलकु सुनि भा उर दाहू।।
English explanation
She asked people what the excitement was about. Hearing of Rama’s coronation, she felt a burning resentment in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूछेसि | उसने पूछा | she asked |
| लोगन्ह | लोगों से | the people |
| काह | किसलिए | why |
| उछाहू | उत्साह, उत्सव | excitement, celebration |
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| तिलकु | राजतिलक | coronation |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| भा | हुआ | arose |
| उर | हृदय में | in her heart |
| दाहू | जलन, संताप | burning resentment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 354
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 354, 354
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