अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दलि दुख सजइ सकल कल्याना। अस असीस राउरि जगु जाना।।
मूल पाठ
दलि दुख सजइ सकल कल्याना। अस असीस राउरि जगु जाना।।
सो गोसाइँ बिधि गति जेहिं छेंकी। सकइ को टारि टेक जो टेकी।।
स्रोत अभिलेख 2.255 · पुस्तक पृ. 556, 557
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपकी आशिष ही एक ऐसी है जो दु:खोंका दमन करके, समस्त कल्याणोंको सज देती है; यह जगत् जानता है। हे स्वामी! आप वही हैं जिन्होंने विधाताकी गति (विधान) को भी रोक दिया। आपने जो टेक टेक दी (जो निश्चय कर दिया) उसे कौन टाल सकता है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 556 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दलि दुख सजइ सकल कल्याना। अस असीस राउरि जगु जाना।।
English explanation
Your blessing destroys sorrow and brings about every kind of well-being; the world knows it to be so.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दलि | नष्ट करके | having destroyed |
| दुख | दुःख | sorrow |
| सजइ | सँवार देता है | brings about |
| सकल | समस्त | all |
| कल्याना | कल्याण | well-being |
| अस | ऐसा | such |
| असीस | आशीर्वाद | blessing |
| राउरि | आपका | your |
| जगु | जगत | the world |
| जाना | जानता है | knows |
2 सो गोसाइँ बिधि गति जेहिं छेंकी। सकइ को टारि टेक जो टेकी।।
English explanation
Master, you are the one who checked the course of destiny; who can thwart a resolve you have firmly made?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही आप | that very one, you |
| गोसाइँ | हे स्वामी | O master |
| बिधि | विधाता की | of the Creator |
| गति | गति या विधान | course or decree |
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| छेंकी | रोक दी | checked |
| सकइ | सकता है | can |
| को | कौन | who |
| टारि | टाल | thwart |
| टेक | दृढ़ संकल्प | firm resolve |
| जो | जो | which |
| टेकी | आपने ठान लिया | you have firmly made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.255
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 556
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 556, 557
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।