अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तोर कलंकु मोर पछिताऊ। मुएहुँ न मिटहि न जाइहि काऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकेवल तेरा कलंक और मेरा पछतावा मरनेपर भी नहीं मिटेगा, यह किसी तरह नहीं जायगा। अब तुझे जो अच्छा लगे वही कर। मुँह छिपाकर मेरी आँखोंकी ओट जा बैठ (अर्थात् मेरे सामनेसे हट जा, मुझे मुँह न दिखा)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 373 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तोर कलंकु मोर पछिताऊ। मुएहुँ न मिटहि न जाइहि काऊ।।
अब तोहि नीक लाग करु सोई। लोचन ओट बैठु मुहु गोई।।
स्रोत अभिलेख 2.36 · पुस्तक पृ. 373, 374
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तोर कलंकु मोर पछिताऊ। मुएहुँ न मिटहि न जाइहि काऊ।।
English explanation
Your disgrace and my remorse will not be erased even after death; they will never pass away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोर | तुम्हारा | your |
| कलंकु | कलंक | disgrace |
| मोर | मेरा | my |
| पछिताऊ | पछतावा | remorse |
| मुएहुँ | मरने पर भी | even after death |
| न | नहीं | not |
| मिटहि | मिटेंगे | will be erased |
| न | नहीं | not |
| जाइहि | दूर होंगे | will pass away |
| काऊ | कभी | ever |
2 अब तोहि नीक लाग करु सोई। लोचन ओट बैठु मुहु गोई।।
English explanation
Now do whatever seems good to you. Hide your face and sit out of my sight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| तोहि | तुम्हें | to you |
| नीक | अच्छा | good |
| लाग | लगे | seems |
| करु | करो | do |
| सोई | वही | that very thing |
| लोचन | आँखों की | of the eyes |
| ओट | ओट में, दृष्टि से दूर | out of sight |
| बैठु | बैठो | sit |
| मुहु | मुँह | face |
| गोई | छिपाकर | having hidden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 373
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 373, 374
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।