अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई।।
मूल पाठ
तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई।।
बात दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली। कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली।।
स्रोत अभिलेख 2.28 · पुस्तक पृ. 366, 367
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसपर मेरे द्वारा श्रीरामजीकी शपथ करनेमें आ गयी (मुँहसे निकल पड़ी)। श्रीरघुनाथजी मेरे सुकृत (पुण्य) और स्नेहकी सीमा हैं। इस प्रकार बात पक्की कराके दुर्बुद्धि कैकेयी हँसकर बोली, मानो उसने कुमत (बुरे विचार) रूपी दुष्ट पक्षी (बाज)-[को छोडऩेके लिये उस]-की कुलही (आँखोंपरकी टोपी) खोल दी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 367 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई।।
English explanation
“Moreover, I have sworn by Rama, the lord of Raghu’s line, who is the culmination of my merit and affection.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस बात के | that; the preceding assurance |
| पर | ऊपर; अतिरिक्त | on top of; in addition to |
| राम | राम, दशरथ के पुत्र | Rama, Dasharatha’s son |
| सपथ | शपथ | oath |
| करि | करके; लेकर | having made; having taken |
| आई | कर चुका हूँ | have now done so |
| सुकृत | पुण्य; शुभ कर्मों का फल | merit; the fruit of good deeds |
| सनेह | प्रेम | affection |
| अवधि | परम सीमा; चरम परिणति | utmost limit; culmination |
| रघुराई | रघुनाथ राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 बात दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली। कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली।।
English explanation
Having secured the promise, the misguided Kaikeyi laughed and spoke, as though removing the hood from the wicked bird of her ill counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बात | बात; वचन | the statement; promise |
| दृढ़ाइ | पक्का कराकर | having secured; having confirmed |
| कुमति | दुर्बुद्धि कैकेयी | the misguided Kaikeyi |
| हँसि | हँसकर | laughing |
| बोली | बोली | spoke |
| कुमत | बुरा विचार | ill counsel; evil thought |
| कुबिहग | दुष्ट पक्षी | a wicked bird |
| कुलह | बाज के सिर की टोपी | a hawk’s hood |
| जनु | मानो | as though |
| खोली | खोल दी; हटा दी | opened; removed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 367
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 366, 367
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।