अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि दिन भयउ बिटप तर बासू। लखन सखाँ सब कीन्ह सुपासू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउस दिन पेड़के नीचे निवास हुआ। लक्ष्मणजी और सखा गुहने [विश्रामकी] सब सुव्यवस्था कर दी। प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने सबेरे प्रात:कालकी सब क्रियाएँ करके जाकर तीर्थोंके राजा प्रयागके दर्शन किये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 430 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तेहि दिन भयउ बिटप तर बासू। लखन सखाँ सब कीन्ह सुपासू।।
प्रात प्रातकृत करि रधुसाई। तीरथराजु दीख प्रभु जाई।।
स्रोत अभिलेख 2.105 · पुस्तक पृ. 430, 431
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेहि दिन भयउ बिटप तर बासू। लखन सखाँ सब कीन्ह सुपासू।।
English explanation
That day they stayed beneath a tree. Lakshmana and their friend made all suitable arrangements.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| दिन | दिन | day |
| भयउ | हुआ | took place |
| बिटप | पेड़ | tree |
| तर | के नीचे | beneath |
| बासू | निवास | stay |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s brother |
| सखाँ | सखा ने | their friend |
| सब | सब व्यवस्था | all arrangements |
| कीन्ह | कर दी | made |
| सुपासू | अच्छी सुविधा और व्यवस्था | suitable comforts and arrangements |
2 प्रात प्रातकृत करि रधुसाई। तीरथराजु दीख प्रभु जाई।।
English explanation
In the morning, after completing his morning duties, Lord Rama went to behold Prayag, the king of pilgrimage places.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रात | सुबह | in the morning |
| प्रातकृत | प्रातःकाल के नित्यकर्म | morning duties |
| करि | करके | having performed |
| रधुसाई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| तीरथराजु | तीर्थों के राजा प्रयाग को | Prayag, king of pilgrimage places |
| दीख | देखा; दर्शन किया | beheld |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| जाई | जाकर | having gone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 430
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 430, 431
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।