अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि अवसर रघुबर रूख पाई। केवट पारहि नाव चलाई।।
मूल पाठ
तेहि अवसर रघुबर रूख पाई। केवट पारहि नाव चलाई।।
रघुकुलतिलक चले एहि भाँती। देखउँ ठाढ़ कुलिस धरि छाती।।
स्रोत अभिलेख 2.153 · पुस्तक पृ. 470, 471
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसी समय श्रीरामचन्द्रजीका रुख पाकर केवटने पार जानेके लिये नाव चला दी। इस प्रकार रघुवंशतिलक श्रीरामचन्द्रजी चल दिये और मैं छातीपर वज्र रखकर खड़ा-खड़ा देखता रहा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 470 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेहि अवसर रघुबर रूख पाई। केवट पारहि नाव चलाई।।
English explanation
At that moment, receiving Rama’s signal, the boatman steered the boat toward the opposite bank.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय | moment |
| रघुबर | रघुवंश के श्रेष्ठ श्रीराम का | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| रूख | संकेत या अभिप्राय | signal or intention |
| पाई | पाकर | having received |
| केवट | नाविक | the boatman |
| पारहि | दूसरे तट की ओर | toward the opposite bank |
| नाव | नाव | the boat |
| चलाई | चला दी | set moving |
2 रघुकुलतिलक चले एहि भाँती। देखउँ ठाढ़ कुलिस धरि छाती।।
English explanation
Rama, the glory of Raghu’s lineage, departed in this way, while I stood watching with a heart as hard as a thunderbolt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुकुलतिलक | रघुकुल के गौरव श्रीराम | Rama, the glory of Raghu’s lineage |
| चले | चले गए | departed |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | manner |
| देखउँ | मैं देखता रहा | I kept watching |
| ठाढ़ | खड़ा | standing |
| कुलिस | वज्र जैसी कठोरता | thunderbolt-like hardness |
| धरि | धारण करके | holding |
| छाती | छाती में | in my breast |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.153
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 470
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 470, 471
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