अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा।।
मूल पाठ
तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा।।
कवि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी।।
स्रोत अभिलेख 2.11 · पुस्तक पृ. 434, 435
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसी अवसरपर वहाँ एक तपस्वी आया, जो तेजका पुञ्ज, छोटी अवस्थाका और सुन्दर था। उसकी गति कवि नहीं जानते [अथवा वह कवि था जो अपना परिचय नहीं देना चाहता]। वह वैरागीके वेषमें था और मन, वचन तथा कर्मसे श्रीरामचन्द्रजीका प्रेमी था॥ ४॥ [इस तेज:पुञ्ज तापसके प्रसंगको कुछ टीकाकार क्षेपक मानते हैं और कुछ लोगोंके देखनेमें यह अप्रासंगिक और ऊपरसे जोड़ा हुआ-सा जान भी पड़ता है, परन्तु यह सभी प्राचीन प्रतियोंमें है। गुसाईंजी अलौकिक अनुभवी पुरुष थे। पता नहीं, यहाँ इस प्रसंगके रखनेमें क्या रहस्य है; परन्तु यह क्षेपक तो नहीं है। इस तापसको जब 'कबि अलखित गति कहते हैं, तब निश्चयपूर्वक कौन क्या कह सकता है। हमारी समझसे ये तापस या तो श्रीहनुमान्जी थे अथवा ध्यानस्थ तुलसीदासजी!]
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 435 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा।।
English explanation
At that moment an ascetic arrived, radiant, young, and handsome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसी | that very |
| अवसर | समय | moment |
| एक | एक | an |
| तापसु | तपस्वी | ascetic |
| आवा | आया | arrived |
| तेजपुंज | तेज का पुंज | a mass of radiance |
| लघुबयस | कम आयु वाला | young in age |
| सुहावा | सुंदर | handsome |
2 कवि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी।।
English explanation
He was a poet whose ways were inscrutable, dressed as a renunciant, and devoted to Rama in thought, deed, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवि | कवि | poet |
| अलखित | अगोचर, न जानी जा सकने वाली | unseen or inscrutable |
| गति | गति अथवा आचरण | ways or conduct |
| बेषु | वेश | attire |
| बिरागी | वैरागी का | of a renunciant |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| राम | राम के प्रति | toward Rama |
| अनुरागी | प्रेम रखने वाला | lovingly devoted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 435
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 434, 435
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।