अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह प्रिय पाहुने बन पगु धारे। सेवा जोगु न भाग हमारे।।
मूल पाठ
तुम्ह प्रिय पाहुने बन पगु धारे। सेवा जोगु न भाग हमारे।।
देब काह हम तुम्हहि गोसाँई। ईधनु पात किरात मिताई।।
स्रोत अभिलेख 2.251 · पुस्तक पृ. 552, 553
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप प्रिय पाहुने वनमें पधारे हैं। आपकी सेवा करनेके योग्य हमारे भाग्य नहीं हैं। हे स्वामी! हम आपको क्या देंगे? भीलोंकी मित्रता तो बस, ईंधन (लकड़ी) और पत्तोंहीतक है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 552 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुम्ह प्रिय पाहुने बन पगु धारे। सेवा जोगु न भाग हमारे।।
English explanation
You are dear guests who have set foot in the forest; we lack the good fortune to be worthy of serving you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| पाहुने | अतिथि | guests |
| बन | वन में | in the forest |
| पगु | चरण | feet |
| धारे | रखे हैं | have placed |
| सेवा | सेवा के | for service |
| जोगु | योग्य | worthy |
| न | नहीं | not |
| भाग | सौभाग्य | good fortune |
| हमारे | हमारे | ours |
2 देब काह हम तुम्हहि गोसाँई। ईधनु पात किरात मिताई।।
English explanation
Master, what can we give you? The friendship of forest-dwelling Kiratas offers only firewood and leaves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देब | दें | shall give |
| काह | क्या | what |
| हम | हम | we |
| तुम्हहि | आपको | to you |
| गोसाँई | हे स्वामी | O master |
| ईधनु | ईंधन, जलाने की लकड़ी | fuel, firewood |
| पात | पत्ते | leaves |
| किरात | किरात वनवासियों की | of the forest-dwelling Kiratas |
| मिताई | मित्रता | friendship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.251
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 552
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 552, 553
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।