अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा। बिस्व बदर जिमि तुम्हरें हाथा।।
मूल पाठ
तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा। बिस्व बदर जिमि तुम्हरें हाथा।।
अस कहि प्रभु सब कथा बखानी। जेहि जेहि भाँति दीन्ह बनु रानी।।
स्रोत अभिलेख 2.125 · पुस्तक पृ. 447, 448
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनिनाथ! आप त्रिकालदर्शी हैं। सम्पूर्ण विश्व आपके लिये हथेलीपर रखे हुए बेरके समान है। प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने ऐसा कहकर फिर जिस-जिस प्रकारसे रानी कैकेयीने वनवास दिया, वह सब कथा विस्तारसे सुनायी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 448 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा। बिस्व बदर जिमि तुम्हरें हाथा।।
English explanation
O lord of sages, you perceive past, present, and future; the universe is as clear to you as a jujube fruit held in your hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| त्रिकाल | भूत, वर्तमान और भविष्य | past, present, and future |
| दरसी | देखने और जानने वाले | one who perceives and knows |
| मुनिनाथा | हे मुनियों के स्वामी | O lord of sages |
| बिस्व | विश्व | the universe |
| बदर | बेर का फल | a jujube fruit |
| जिमि | जैसे | like |
| तुम्हरें | आपके | your |
| हाथा | हाथ में | in the hand |
2 अस कहि प्रभु सब कथा बखानी। जेहि जेहि भाँति दीन्ह बनु रानी।।
English explanation
Having said this, Lord Rama related the whole account of how Queen Kaikeyi had brought about his exile to the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| सब | सारी | the entire |
| कथा | कथा, वृत्तांत | account |
| बखानी | विस्तार से सुनाई | recounted |
| जेहि | जिस | in whatever |
| जेहि | जिस | various |
| भाँति | प्रकार | ways |
| दीन्ह | दिया, दिलाया | assigned, brought about |
| बनु | वनवास | forest exile |
| रानी | रानी कैकेयी ने | Queen Kaikeyi |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.125
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 448
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 447, 448
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।