अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह कहुँ बन सब भाँति सुपासू। सँग पितु मातु रामु सिय जासू।।
मूल पाठ
तुम्ह कहुँ बन सब भाँति सुपासू। सँग पितु मातु रामु सिय जासू।।
जेहिं न रामु बन लहहिं कलेसू। सुत सोइ करेहु इहइ उपदेसू।।
स्रोत अभिलेख 2.75 · पुस्तक पृ. 405, 406
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुमको वनमें सब प्रकारसे आराम है, जिसके साथ श्रीरामजी और सीताजीरूप पिता-माता हैं। हे पुत्र! तुम वही करना जिससे श्रीरामचन्द्रजी वनमें क्लेश न पावें, मेरा यही उपदेश है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 406 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुम्ह कहुँ बन सब भाँति सुपासू। सँग पितु मातु रामु सिय जासू।।
English explanation
The forest will be comfortable for you in every way, since Rama and Sita, your father and mother, will be with you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| कहुँ | के लिए | for |
| बन | वन | the forest |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | in respect |
| सुपासू | सुखद और सुविधाजनक | comfortable and congenial |
| सँग | साथ | with |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| सिय | सीता | Sita |
| जासू | जिसके | whose |
2 जेहिं न रामु बन लहहिं कलेसू। सुत सोइ करेहु इहइ उपदेसू।।
English explanation
Son, do whatever will keep Rama from suffering in the forest; this is my counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिससे | by which |
| न | नहीं | not |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| बन | वन में | in the forest |
| लहहिं | पाएँ | experience |
| कलेसू | कष्ट | distress |
| सुत | बेटा | son |
| सोइ | वही | that very thing |
| करेहु | करना | do |
| इहइ | यही | this alone |
| उपदेसू | उपदेश | counsel |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 406
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 405, 406
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।