अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई।।
मूल पाठ
तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई।।
गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी।।
स्रोत अभिलेख 2.232 · पुस्तक पृ. 536, 537
भावार्थ
मूल पाठ के बादअन्धकार चाहे तरुण (मध्याह्नके) सूर्यको निगल जाय। आकाश चाहे बादलोंमें समाकर मिल जाय। गौके खुर-इतने जलमें अगस्त्यजी डूब जायँ और पृथ्वी चाहे अपनी स्वाभाविक क्षमा (सहनशीलता) को छोड़ दे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 536 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई।।
English explanation
Even if darkness were to swallow the vigorous sun, and the sky were to merge into the clouds and disappear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिमिरु | अंधकार | darkness |
| तरुन | तरुण, प्रखर | young and vigorous |
| तरनिहि | सूर्य को | the sun, as object |
| मकु | भले ही; मान लो | even if; suppose |
| गिलई | निगल ले | were to swallow |
| गगनु | आकाश | the sky |
| मगन | लीन, डूबा हुआ | submerged; absorbed |
| मकु | भले ही | even if |
| मेघहिं | बादलों में | into the clouds |
| मिलई | मिल जाए | were to merge |
2 गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी।।
English explanation
Even if the sage Agastya were to drown in the water of a cow's hoofprint, and the earth were to abandon her innate forbearance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गोपद | गाय के खुर का निशान | a cow's hoofprint |
| जल | जल में | in the water |
| बूड़हिं | डूब जाएँ | were to drown |
| घटजोनी | घड़े से जन्मे अगस्त्य मुनि | Agastya, the pot-born sage |
| सहज | स्वाभाविक | innate |
| छमा | क्षमा, सहनशीलता | forbearance; forgiveness |
| बरु | भले ही | even if |
| छाड़ै | छोड़ दे | were to abandon |
| छोनी | पृथ्वी | the earth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.232
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 536
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका लक्ष्मणजीको समझाना एवं भरतजीकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 536, 537
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।