अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिन्हहि सोहाइ न अवध बधावा। चोरहि चंदिनि राति न भावा।।
मूल पाठ
तिन्हहि सोहाइ न अवध बधावा। चोरहि चंदिनि राति न भावा।।
सारद बोलि बिनय सुर करहीं। बारहिं बार पाय लै परहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.11 · पुस्तक पृ. 352, 353
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें (देवताओंको) अवधके बधावे नहीं सुहाते, जैसे चोरको चाँदनी रात नहीं भाती। सरस्वतीजीको बुलाकर देवता विनय कर रहे हैं और बार-बार उनके पैरोंको पकड़कर उनपर गिरते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 352 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तिन्हहि सोहाइ न अवध बधावा। चोरहि चंदिनि राति न भावा।।
English explanation
Ayodhya's celebration does not please them, just as a moonlit night does not please a thief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्हहि | उन देवताओं को | to those gods |
| सोहाइ | सुहाता है | is pleasing |
| न | नहीं | not |
| अवध | अयोध्या का | of Ayodhya |
| बधावा | मंगलोत्सव | festive celebration |
| चोरहि | चोर को | to a thief |
| चंदिनि | चाँदनी वाली | moonlit |
| राति | रात | night |
| न | नहीं | not |
| भावा | अच्छी लगती | is pleasing |
2 सारद बोलि बिनय सुर करहीं। बारहिं बार पाय लै परहीं।।
English explanation
The gods summon Saraswati and plead with her, repeatedly clasping her feet and falling before her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सारद | सरस्वती, वाणी की देवी | Saraswati, goddess of speech |
| बोलि | बुलाकर | having summoned |
| बिनय | विनती | entreaty |
| सुर | देवता | the gods |
| करहीं | करते हैं | make |
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बार | बार | time |
| पाय | चरण | feet |
| लै | पकड़कर | clasping |
| परहीं | गिरते हैं | fall before her |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 352
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 352, 353
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