अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कनक सिंघासन सीय समेता। बैठहिं रामु होइ चित चेता।।
मूल पाठ
कनक सिंघासन सीय समेता। बैठहिं रामु होइ चित चेता।।
सकल कहहिं कब होइहि काली। बिघन मनावहिं देव कुचाली।।
स्रोत अभिलेख 2.11 · पुस्तक पृ. 352, 353
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब सीताजीसहित श्रीरामचन्द्रजी सुवर्णके सिंहासनपर विराजेंगे और हमारा मनचीता होगा (मन:कामना पूरी होगी)। इधर तो सब यह कह रहे हैं कि कल कब होगा, उधर कुचक्री देवता विघ्न मना रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 352 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कनक सिंघासन सीय समेता। बैठहिं रामु होइ चित चेता।।
English explanation
May Rama sit on the golden throne with Sita, and may our cherished wish come true.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कनक | सोने का | golden |
| सिंघासन | सिंहासन पर | on the throne |
| सीय | सीता | Sita, Rama's wife |
| समेता | सहित | together with |
| बैठहिं | बैठें | may sit |
| रामु | राम | Rama |
| होइ | पूरी हो | may come true |
| चित | मन में | in the heart |
| चेता | सोचा हुआ मनोरथ | cherished wish |
2 सकल कहहिं कब होइहि काली। बिघन मनावहिं देव कुचाली।।
English explanation
Everyone says, ‘When will tomorrow come?’ But the scheming gods wish for an obstacle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सब लोग | everyone |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| कब | कब | when |
| होइहि | होगा | will come |
| काली | कल का दिन | tomorrow |
| बिघन | विघ्न पड़ने की | an obstacle |
| मनावहिं | कामना करते हैं | wish for |
| देव | देवता | gods |
| कुचाली | कुचाल चलने वाले | scheming |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 352
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 352, 353
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।