अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तापस बेष जनक सिय देखी। भयउ पेमु परितोषु बिसेषी।।
मूल पाठ
तापस बेष जनक सिय देखी। भयउ पेमु परितोषु बिसेषी।।
पुत्रि पवित्र किए कुल दोऊ। सुजस धवल जगु कह सबु कोऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.287 · पुस्तक पृ. 583, 584
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीको तपस्विनी-वेषमें देखकर जनकजीको विशेष प्रेम और सन्तोष हुआ। [उन्होंने कहा—] बेटी! तूने दोनों कुल पवित्र कर दिये। तेरे निर्मल यशसे सारा जगत् उज्ज्वल हो रहा है; ऐसा सब कोई कहते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 583 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तापस बेष जनक सिय देखी। भयउ पेमु परितोषु बिसेषी।।
English explanation
Seeing Sita dressed as an ascetic, Janaka felt profound love and satisfaction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तापस | तपस्वी का | an ascetic’s |
| बेष | वेश | attire |
| जनक | सीता के पिता राजा जनक ने | King Janaka, Sita’s father |
| सिय | सीता को | Sita |
| देखी | देखा | saw |
| भयउ | हुआ | arose |
| पेमु | प्रेम | love |
| परितोषु | संतोष | satisfaction |
| बिसेषी | विशेष | especially great |
2 पुत्रि पवित्र किए कुल दोऊ। सुजस धवल जगु कह सबु कोऊ।।
English explanation
Daughter, you have sanctified both families. Everyone in the world speaks of your spotless renown.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुत्रि | हे पुत्री | O daughter |
| पवित्र | पवित्र | holy |
| किए | कर दिए | have made |
| कुल | कुलों को | families |
| दोऊ | दोनों | both |
| सुजस | उत्तम यश | good renown |
| धवल | निर्मल | spotless |
| जगु | संसार में | in the world |
| कह | कहता है | speaks of |
| सबु | सब | every |
| कोऊ | कोई | person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.287
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 583
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 583, 584
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।