अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिति सुरसरि कीरति सरि तोरी। गवनु कीन्ह बिधि अंड करोरी।।
मूल पाठ
जिति सुरसरि कीरति सरि तोरी। गवनु कीन्ह बिधि अंड करोरी।।
गंग अवनि थल तीनि बड़ेरे। एहिं किए साधु समाज घनेरे।।
स्रोत अभिलेख 2.287 · पुस्तक पृ. 583, 584
भावार्थ
मूल पाठ के बादतेरी कीॢतरूपी नदी देवनदी गङ्गाजीको भी जीतकर [जो एक ही ब्रह्माण्डमें बहती है] करोड़ों ब्रह्माण्डोंमें बह चली है। गङ्गाजीने तो पृथ्वीपर तीन ही स्थानों (हरिद्वार, प्रयागराज और गङ्गासागर) को बड़ा (तीर्थ) बनाया है। पर तेरी इस कीॢतनदीने तो अनेकों संतसमाजरूपी तीर्थस्थान बना दिये हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 583 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिति सुरसरि कीरति सरि तोरी। गवनु कीन्ह बिधि अंड करोरी।।
English explanation
The river of your fame has surpassed the Ganges and flowed through countless millions of universes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिति | जीतकर; पीछे छोड़कर | having surpassed |
| सुरसरि | देवनदी गंगा को | the Ganges, the divine river |
| कीरति | कीर्ति की | of fame |
| सरि | नदी | river |
| तोरी | तुम्हारी | your |
| गवनु | गमन; प्रवाह | movement; flowing |
| कीन्ह | किया | has made |
| बिधि | ब्रह्मा के | Brahma’s |
| अंड | ब्रह्मांडों में | in cosmic worlds |
| करोरी | करोड़ों | by the crore; countless millions |
2 गंग अवनि थल तीनि बड़ेरे। एहिं किए साधु समाज घनेरे।।
English explanation
On earth the Ganges has three great sacred sites; this river of your fame, however, has sanctified many communities of saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गंग | गंगा के | of the Ganges |
| अवनि | पृथ्वी पर | on earth |
| थल | तीर्थस्थल | sacred sites |
| तीनि | तीन | three |
| बड़ेरे | बड़े; प्रमुख | great; prominent |
| एहिं | इस कीर्ति-नदी ने | this river of fame |
| किए | पवित्र किए | has sanctified |
| साधु | संतों के | of saints |
| समाज | समुदाय | communities |
| घनेरे | बहुत-से | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.287
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 583
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 583, 584
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।