अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू। राम चरन अनुराग अगाधू।।
मूल पाठ
तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू। राम चरन अनुराग अगाधू।।
बाद गलानि करहु मन माहीं। तुम्ह सम रामहि कोउ प्रिय नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.205 · पुस्तक पृ. 513, 514
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात भरत! तुम सब प्रकारसे साधु हो। श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें तुम्हारा अथाह प्रेम है। तुम व्यर्थ ही मनमें ग्लानि कर रहे हो। श्रीरामचन्द्रको तुम्हारे समान प्रिय कोई नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 514 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू। राम चरन अनुराग अगाधू।।
English explanation
Dear Bharata, you are virtuous in every way; your love for Rama’s feet is unfathomable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय पुत्र, प्रिय जन | dear child, dear one |
| भरत | हे भरत | Bharata |
| तुम्ह | तुम | you |
| सब | हर | every |
| बिधि | प्रकार से | way |
| साधू | सज्जन, सदाचारी | virtuous, saintly |
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| चरन | चरणों में | for the feet |
| अनुराग | प्रेम | love |
| अगाधू | अथाह | unfathomable |
2 बाद गलानि करहु मन माहीं। तुम्ह सम रामहि कोउ प्रिय नाहीं।।
English explanation
You needlessly harbor remorse in your heart; no one is as dear to Rama as you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाद | व्यर्थ, अकारण | needlessly |
| गलानि | ग्लानि, आत्म-दोष का दुःख | remorse, self-reproach |
| करहु | करते हो | you feel, you harbor |
| मन | मन | mind, heart |
| माहीं | में | within |
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| सम | समान | as, equal to |
| रामहि | राम को | to Rama |
| कोउ | कोई | anyone |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.205
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 514
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 513, 514
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