अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए। करि बिनती रथ रामु चढ़ाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब (वहाँ पहुँचकर) सुमन्त्रने राजाके वचन श्रीरामचन्द्रजीको सुनाये और विनती करके उनको रथपर चढ़ाया। सीताजीसहित दोनों भाई रथपर चढ़कर हृदयमें अयोध्याको सिर नवाकर चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 412 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए। करि बिनती रथ रामु चढ़ाए।।
चढ़ि रथ सीय सहित दोउ भाई। चले हृदयँ अवधहि सिरु नाई।।
स्रोत अभिलेख 2.83 · पुस्तक पृ. 412, 412
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए। करि बिनती रथ रामु चढ़ाए।।
English explanation
Then Sumantra conveyed the king’s words and, after making a respectful request, helped Rama board the chariot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सुमंत्र | राजा के मंत्री और सारथी सुमंत्र | Sumantra, the king’s minister and charioteer |
| नृप | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| बचन | वचन; संदेश | words; message |
| सुनाए | सुनाए | conveyed |
| करि | करके | having made |
| बिनती | विनती | a respectful request |
| रथ | रथ पर | onto the chariot |
| रामु | राम को | Rama |
| चढ़ाए | चढ़ाया; सवार कराया | helped board; seated |
2 चढ़ि रथ सीय सहित दोउ भाई। चले हृदयँ अवधहि सिरु नाई।।
English explanation
The two brothers boarded the chariot with Sita and departed, inwardly bowing their heads to Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढ़ि | चढ़कर | having boarded |
| रथ | रथ पर | the chariot |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सहित | के साथ | with |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| चले | चल पड़े | departed |
| हृदयँ | हृदय में; मन ही मन | in their hearts; inwardly |
| अवधहि | अयोध्या को | to Ayodhya |
| सिरु | सिर | heads |
| नाई | नवाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.83
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 412
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 412, 412
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।