अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब रघुबीर श्रमित सिय जानी। देखि निकट बटु सीतल पानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब श्रीरामचन्द्रजी सीताजीको थकी हुई जानकर और समीप ही एक बड़का वृक्ष और ठंडा पानी देखकर उस दिन वहीं ठहर गये। कन्द, मूल, फल खाकर [रातभर वहाँ रहकर] प्रात:काल स्नान करके श्रीरघुनाथजी आगे चले॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 446 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब रघुबीर श्रमित सिय जानी। देखि निकट बटु सीतल पानी।।
तहँ बसि कंद मूल फल खाई। प्रात नहाइ चले रघुराई।।
स्रोत अभिलेख 2.124 · पुस्तक पृ. 446, 447
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब रघुबीर श्रमित सिय जानी। देखि निकट बटु सीतल पानी।।
English explanation
Then Rama, the hero of Raghu’s line, recognized that Sita was tired and saw a banyan tree and cool water nearby.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम ने | Rama, hero of Raghu’s line |
| श्रमित | थकी हुई | weary |
| सिय | सीता को | Sita |
| जानी | जानकर; समझकर | recognizing; realizing |
| देखि | देखकर | seeing |
| निकट | पास में | nearby |
| बटु | बरगद का पेड़ | banyan tree |
| सीतल | ठंडा | cool |
| पानी | जल | water |
2 तहँ बसि कंद मूल फल खाई। प्रात नहाइ चले रघुराई।।
English explanation
They stayed there and ate tubers, roots, and fruit; in the morning, Rama bathed and set out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| बसि | ठहरकर | having stayed |
| कंद | कंद | tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruit |
| खाई | खाकर | having eaten |
| प्रात | सुबह | in the morning |
| नहाइ | स्नान करके | having bathed |
| चले | चल पड़े | set out |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.124
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 446
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 446, 447
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।