अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
झलका झलकत पायन्ह कैंसें। पंकज कोस ओस कन जैसें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनके चरणोंमें छाले कैसे चमकते हैं, जैसे कमलकी कलीपर ओसकी बूँदें चमकती हों। भरतजी आज पैदल ही चलकर आये हैं, यह समाचार सुनकर सारा समाज दु:खी हो गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 512 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
झलका झलकत पायन्ह कैंसें। पंकज कोस ओस कन जैसें।।
भरत पयादेहिं आए आजू। भयउ दुखित सुनि सकल समाजू।।
स्रोत अभिलेख 2.204 · पुस्तक पृ. 512, 513
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 झलका झलकत पायन्ह कैंसें। पंकज कोस ओस कन जैसें।।
English explanation
The blisters on his feet glistened like drops of dew on a lotus bud.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| झलका | छाले | blisters |
| झलकत | झलक रहे थे | were glistening |
| पायन्ह | पैरों में | on the feet |
| कैंसें | कैसे; किस प्रकार | how; in what manner |
| पंकज | कमल | lotus |
| कोस | कली; मुकुल | bud |
| ओस | ओस | dew |
| कन | कण; बूँदें | droplets |
| जैसें | जैसे | like |
2 भरत पयादेहिं आए आजू। भयउ दुखित सुनि सकल समाजू।।
English explanation
Hearing that Bharata had arrived on foot today, the entire gathering became distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| पयादेहिं | पैदल ही | on foot |
| आए | आए हैं | have arrived |
| आजू | आज | today |
| भयउ | हो गया | became |
| दुखित | दुखी | distressed |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| सकल | सारा | entire |
| समाजू | समाज; जनसमूह | gathering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.204
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 512
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 512, 513
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।