अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौ नहिं फिरहिं धीर दोउ भाई। सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई।।
मूल पाठ
जौ नहिं फिरहिं धीर दोउ भाई। सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई।।
तौ तुम्ह बिनय करेहु कर जोरी। फेरिअ प्रभु मिथिलेसकिसोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.82 · पुस्तक पृ. 411, 412
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि धैर्यवान् दोनों भाई न लौटें—क्योंकि श्रीरघुनाथजी प्रणके सच्चे और दृढ़तासे नियमका पालन करनेवाले हैं—तो तुम हाथ जोड़कर विनती करना कि हे प्रभो! जनककुमारी सीताजीको तो लौटा दीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 411 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौ नहिं फिरहिं धीर दोउ भाई। सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई।।
English explanation
If the two steadfast brothers do not return—Rama is true to his word and firm in his vow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौ | यदि | if |
| नहिं | नहीं | not |
| फिरहिं | लौटें | return |
| धीर | धैर्यवान | steadfast |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| सत्यसंध | सत्यप्रतिज्ञ | true to his word |
| दृढ़ब्रत | व्रत में अडिग | firm in his vow |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
2 तौ तुम्ह बिनय करेहु कर जोरी। फेरिअ प्रभु मिथिलेसकिसोरी।।
English explanation
Then plead with folded hands: ‘Lord, please send back Sita, the daughter of Mithila’s king.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| तुम्ह | तुम | you |
| बिनय | विनती | a humble request |
| करेहु | करना | make |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having folded |
| फेरिअ | लौटा दीजिए | please send back |
| प्रभु | हे स्वामी | O Lord |
| मिथिलेसकिसोरी | मिथिला-नरेश जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka, king of Mithila |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.82
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 411
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 411, 412
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।