अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं पाँचहि मत लागै नीका। करहु हरषि हियँ रामहि टीका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[और कहा—] यदि पंचोंको (आप सबको) यह मत अच्छा लगे, तो हृदयमें हॢषत होकर आपलोग श्रीरामचन्द्रका राजतिलक कीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 347 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं पाँचहि मत लागै नीका। करहु हरषि हियँ रामहि टीका।।
स्रोत अभिलेख 2.5 · पुस्तक पृ. 347, 348
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं पाँचहि मत लागै नीका। करहु हरषि हियँ रामहि टीका।।
English explanation
If this proposal seems good to you all, joyfully perform Rama’s royal consecration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| पाँचहि | आप सभी को | to you all |
| मत | विचार या प्रस्ताव | the proposal |
| लागै | लगे | seems |
| नीका | अच्छा | good |
| करहु | कीजिए | perform |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| हियँ | हृदय में | in your hearts |
| रामहि | राम को | for Rama |
| टीका | राजतिलक | royal consecration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 347
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 347, 348
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।