अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं जियँ होति न कपट कुचाली। केहि सोहाति रथ बाजि गजाली।।
मूल पाठ
जौं जियँ होति न कपट कुचाली। केहि सोहाति रथ बाजि गजाली।।
भरतहि दोसु देइ को जाएँ। जग बौराइ राज पदु पाएँ।।
स्रोत अभिलेख 2.228 · पुस्तक पृ. 533, 534
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि इनके हृदयमें कपट और कुचाल न होती, तो रथ, घोड़े और हाथियोंकी कतार [ऐसे समय] किसे सुहाती? परन्तु भरतको ही व्यर्थ कौन दोष दे? राजपद पा जानेपर सारा जगत् ही पागल (मतवाला) हो जाता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 534 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं जियँ होति न कपट कुचाली। केहि सोहाति रथ बाजि गजाली।।
English explanation
If there were no deceit or evil scheming in his heart, what purpose would justify chariots, horses and ranks of elephants?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| जियँ | हृदय में | in the heart |
| होति | होती | were present |
| न | नहीं | not |
| कपट | छल | deceit |
| कुचाली | बुरी चाल; दुष्ट योजना | evil scheming |
| केहि | किसलिए; किस प्रयोजन से | for what purpose |
| सोहाति | शोभा देती; उचित लगती | would be fitting |
| रथ | रथ | chariots |
| बाजि | घोड़े | horses |
| गजाली | हाथियों की पंक्तियाँ | ranks of elephants |
2 भरतहि दोसु देइ को जाएँ। जग बौराइ राज पदु पाएँ।।
English explanation
Why blame Bharata needlessly? People become mad on gaining royal power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत को | to Bharata |
| दोसु | दोष | blame |
| देइ | दे; लगाए | should assign |
| को | कौन | who |
| जाएँ | व्यर्थ; नाहक | needlessly; in vain |
| जग | जगत; संसार के लोग | the world; people |
| बौराइ | बौरा जाता है | goes mad |
| राज | राजकीय | royal |
| पदु | पद; सत्ता | office; power |
| पाएँ | पाने पर | upon obtaining |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.228
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 534
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 533, 534
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।