अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि कुमंत्रु मन साजि समाजू। आए करै अकंटक राजू।।
मूल पाठ
करि कुमंत्रु मन साजि समाजू। आए करै अकंटक राजू।।
कोटि प्रकार कलपि कुटलाई। आए दल बटोरि दोउ भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.228 · पुस्तक पृ. 533, 534
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपने मनमें बुरा विचार करके, समाज जोड़कर राज्यको निष्कण्टक करनेके लिये यहाँ आये हैं। करोड़ों (अनेकों) प्रकारकी कुटिलताएँ रचकर सेना बटोरकर दोनों भाई आये हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 533 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करि कुमंत्रु मन साजि समाजू। आए करै अकंटक राजू।।
English explanation
Devising an evil plan in his mind and assembling a company, he has come to rule without opposition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके; बनाकर | having made |
| कुमंत्रु | बुरी योजना; षड्यंत्र | evil plan; conspiracy |
| मन | मन में | in the mind |
| साजि | सजाकर; जुटाकर | having assembled |
| समाजू | दल; साथियों का समूह | company; assembled followers |
| आए | आए हैं | have come |
| करै | करने के लिए | in order to exercise |
| अकंटक | बिना बाधा या विरोध के | without obstacles or opposition |
| राजू | राज्य; शासन | rule; sovereignty |
2 कोटि प्रकार कलपि कुटलाई। आए दल बटोरि दोउ भाई।।
English explanation
Devising countless kinds of treachery, the two brothers have come after gathering an army.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटि | करोड़ों; असंख्य | millions; countless |
| प्रकार | प्रकार की | kinds of |
| कलपि | कल्पना करके; सोचकर | having devised |
| कुटलाई | कुटिलता; कपटी योजनाएँ | treachery; deceitful schemes |
| आए | आए हैं | have come |
| दल | सेना | an army |
| बटोरि | इकट्ठी करके | having gathered |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई—भरत और शत्रुघ्न | brothers—Bharata and Shatrughna |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.228
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 533
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 533, 534
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।