अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं ए कंद मूल फल खाहीं। बादि सुधादि असन जग माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो ये कन्द, मूल, फल खाते हैं तो जगत्में अमृत आदि भोजन व्यर्थ ही हैं। कोई एक कहते हैं—ये स्वभावसे ही सुन्दर हैं [इनका सौन्दर्य-माधुर्य नित्य और स्वाभाविक है]। ये अपने-आप प्रकट हुए हैं, ब्रह्माके बनाये नहीं हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 443 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं ए कंद मूल फल खाहीं। बादि सुधादि असन जग माहीं।।
एक कहहिं ए सहज सुहाए। आपु प्रगट भए बिधि न बनाए।।
स्रोत अभिलेख 2.12 · पुस्तक पृ. 443, 444
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं ए कंद मूल फल खाहीं। बादि सुधादि असन जग माहीं।।
English explanation
AI draft: If these travelers eat tubers, roots, and fruit, then nectar and other fine foods in the world are wasted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| ए | ये—राम, सीता और लक्ष्मण | these travelers—Rama, Sita, and Lakshmana |
| कंद | कंद | tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruit |
| खाहीं | खाते हैं | eat |
| बादि | व्यर्थ | wasted; of no use |
| सुधादि | अमृत आदि | nectar and the like |
| असन | भोजन | foods |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
2 एक कहहिं ए सहज सुहाए। आपु प्रगट भए बिधि न बनाए।।
English explanation
Some say: They are naturally beautiful; they manifested on their own, and Brahma did not create them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | कुछ लोग | some people |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| ए | ये | these travelers |
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| सुहाए | सुंदर | beautiful |
| आपु | स्वयं | on their own |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| भए | हुए | became; appeared |
| बिधि | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| न | नहीं | not |
| बनाए | बनाया | created them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 443
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 443, 444
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।