अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा। सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुनीश्वरने जिसको जिस कामके लिये आज्ञा दी, उसने वह काम [इतनी शीघ्रतासे कर डाला कि] मानो पहलेसे ही कर रखा था। राजा ब्राह्मण, साधु और देवताओंको पूज रहे हैं और श्रीरामचन्द्रजीके लिये सब मङ्गलकार्य कर रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 349 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा। सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा।।
बिप्र साधु सुर पूजत राजा। करत राम हित मंगल काजा।।
स्रोत अभिलेख 2.7 · पुस्तक पृ. 349, 349
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा। सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा।।
English explanation
Whatever order the chief sage gave to someone, that person carried out the task as though it had already been done.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो आदेश | whatever order |
| मुनीस | मुनिराज ने; यहाँ वसिष्ठ | the chief sage, here Vasishtha |
| जेहि | जिसे | to whom |
| आयसु | आदेश | command |
| दीन्हा | दिया | gave |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| तेहिं | वह आदेशित | that assigned |
| काजु | काम | task |
| प्रथम | पहले ही | already beforehand |
| जनु | मानो | as though |
| कीन्हा | कर दिया | had done |
2 बिप्र साधु सुर पूजत राजा। करत राम हित मंगल काजा।।
English explanation
The king was worshipping Brahmins, holy people, and deities, and performing auspicious rites for Rama’s welfare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मणों को | Brahmins |
| साधु | साधुओं को | holy people |
| सुर | देवताओं को | deities |
| पूजत | पूज रहे थे | was worshipping |
| राजा | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| करत | कर रहे थे | was performing |
| राम | राम के | Rama’s |
| हित | हित के लिए | for the welfare of |
| मंगल | मंगलकारी | auspicious |
| काजा | कार्य | rites and activities |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 349
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 349
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।